जब अमिताभ बच्चन के कहने पर बदला गया था राष्ट्रपति भवन का एक नियम

पिछली सदी के महानायक माने जाने वाले अमिताभ बच्चन ने राजीव गांधी के साथ मिलकर 80 के दशक में राजनीति में भी अपना हाथ चमकाने के प्रयास किए थे।
लेकिन अमिताभ बच्चन ज्यादा दिन तक राजनीति में नहीं टिक पाए थे पर उनका फिल्मी करियर हमेशा उन पर मेहरबान रहा जिसके कारण आज उनके करोड़ों फैंस हैं।

आज हम अपने आर्टिकल में अमिताभ बच्चन के उस किस्से का जिक्र करने जा रहे हैं जब अमिताभ बच्चन को राष्ट्रपति भवन का दौरा करने का एक अवसर मिला था और अमिताभ बच्चन ने वहां से जाने के बाद राष्ट्रपति भवन का एक नियम बदलवा दिया था।

80 के दशक में अमिताभ का एक्टिंग करियर अपने चरम पर था लेकिन उस वक्त उन्होंने राजनीति में जाने का कदम उठाया जो कि उनके जीवन की सबसे बड़ी गलती मानी जाती है। अपने राजनीतिक करियर के बीच में ही उनको एक बार राष्ट्रपति भवन में खाना खाने का न्योता प्राप्त हुआ था और आपको जानकर हैरानी होगी । डिनर के बाद एक प्रचलित नियम को राष्ट्रपति भवन से बदल दिया गया था। इसके लिए बकायदा संसद में कानून भी पारित हुआ था आइए आपको बताते हैं कि वह नियम कौन सा था।

खाने की प्लेट पर राष्ट्रीय प्रतीक देख भड़क उठे थे अमिताभ बच्चन

जानकारों के अनुसार अमिताभ बच्चन जब डिनर करने के लिए कुर्सी पर बैठे तो उन्होंने खाने की प्लेट पर राष्ट्रीय प्रतीक को देखा और वह बात उनको भी बिल्कुल पसंद नहीं है और यह बात उन्होंने संसद के सामने रखी और इस नियम को बदलाव करने की पेशकश की।

प्लेट पर अशोक स्तंभ का प्रयोग प्रतीक का अपमान बताया था, अमिताभ बच्चन ने

संसद में राष्ट्रीय प्रतीक का महत्व बताते हुए अमिताभ बच्चन ने इस परंपरा को तोड़ने का सुझाव संसद के सामने रखा था और प्लेट पर राष्ट्रीय स्तंभ का होना देश के लिए अपमान बताया था। संसद ने उनके इस सुझाव को स्वीकारा था और कानून भी पारित किया था और बाद में खाने की प्लेटों से राष्ट्रीय स्तंभ को हटा दिया गया था।

आपको जानकर हैरानी होगी कि राजीव गांधी के कहने पर 1984 में अमिताभ बच्चन इलाहाबाद लोकसभा से चुनाव लड़े थे और इस सीट पर उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमवती बहुगुणा को हराया था। जो कि उस समय किस स्टेट की सबसे प्रबल दावेदार मानी जा रहे थे खैर अब तो अमिताभ बच्चन ने राजनीतिक करियर से अपनी दूरी बना ली है और वह केवल फिल्मों में ही सक्रिय रहते हैं।

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