जानिय क्या होगा सुशील कुमार के मेडल और पद्मश्री का

सागर राणा हत्याकांड में सुशील कुमार की गिरफ्तारी के बाद से उनके मेडल, और पुरस्कार वापस लेने की मांग जोर पकड़ रही है. ऐसे में ये जानना भी जरूरी है कि क्या सुशील कुमार से ये अवॉर्ड और मेडल वापस लिए जा सकते हैं.

37 वर्षीय सुशील को देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री पुरस्कार दिया गया हैं. इसके अलावा सुशील कुमार को अर्जुन अवॉर्ड से लेकर राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड भी मिल चुका है. 2 बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील के नाम कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार भी हैं.

सुशील कुमार को जो पुरस्कार मिले हैं, उन्हें दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है एक अंतरराष्ट्रीय पदक और दूसरा राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान. क्या ओलंपिक में जीते गए मेडल वापस ले लिए जाएँगे? देखना ये भी अहम हैं कि इतिहास में पहले कभी ऐसा हुआ हैं जब जेल जाने वाले खिलाड़ी से मेडल वापसी लिए गए हैं. यह पता लगाने के लिए हमने ओलंपिक खेलों से संबंधित वेबसाइट की खोज की और पाया कि सुशील की तरह 13 और ओलंपियन भी गिरफ्तार किए गए और हत्या, मानव तस्करी या यौन शोषण से जुड़े मामलों में जेल भेजे गए. खिलाड़ियों को भी अदालत ने दोषी ठहराया था, जिसमें ऑस्कर पिस्टोरियस, एक प्रसिद्ध पैरालिम्पियन, जिसे ‘द ब्लेड रनर’ के नाम से जाना जाता है, जिसने 2013 में वेलेंटाइन डे पर अपनी ही प्रेमिका की गोली मारकर हत्या कर दी थी.

लेकिन ऑस्कर पिस्टोरियस से ओलंपिक मेडल वापस नहीं लिया गया क्योंकि ओलंपिक समिति केवल उन खिलाड़ियों से मेडल वापस ले सकती थी जो शारीरिक टेस्ट के दौरान स्टेरॉयड का उपयोग करने के दोषी पाए जाते हैं. यदि कोई खिलाड़ी मेडल जीतने के बाद अपराध करता है, तो उसके द्वारा जीतने वालों पदकों को उस आधार पर वापस नहीं लिया जा सकता है. ऐसे में सुशील कुमार को कोर्ट में दोषी पाए जाने पर भी ओलिंपिक मेडल वापस नहीं लिया जा सकता है ऐसे में दोनों ओलंपिक पदक उनके पास रहेंगे.

जहां तक उन्हें भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर दिए गए सम्मान और पुरस्कार का सवाल है, वह भी उनके दोषी साबित होने से पहले वापस नहीं लिया जा सकता है. खेल मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक अदालत सुशील कुमार को हत्या के मामले में दोषी नहीं मानती, तक तक वह राष्ट्रपति को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार या अर्जुन पुरस्कार वापस लेने के लिए नहीं लिखेगी. भारत में, आरोपी व्यक्ति को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक कि अदालत उसे दोषी करार न कर दे.

 

पद्म पुरस्कारों की शुरुआत हमारे देश में 1954 में हुई थी लेकिन पद्म पुरस्कारों के इतिहास में अब तक किसी भी ऐसे व्यक्ति से सरकार द्वारा पुरस्कार वापस नहीं लिया गया है जिसे भारत सरकार द्वारा पद्म पुरस्कार दिया गया हो. ऐसे में सरकार के पास सुशील कुमार से पद्म श्री पुरस्कार वापस लेने की कोई गुंजाइश नहीं है. हालांकि, सरकार के खिलाफ विरोध जताने के लिए पद्म पुरस्कार लौटाने और नामांकन खारिज करने के कई मामले सामने आ रहे हैं.

उदाहरण के लिए, प्रसिद्ध लेखक और पत्रकार खुशवंत सिंह ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में 1984 में पद्म भूषण लौटाया था. अभिनेता सलमान खान के पिता सलीम खान ने 2015 में पद्म श्री लेने से इनकार कर दिया था क्योंकि उन्होंने कहा था कि यह पुरस्कार उनसे जूनियर अभिनेताओं को सालों पहले दिया गया था. जस्टिस जेएस वर्मा के परिवार ने भी मरणोपरांत पद्म भूषण लेने से इनकार कर दिया क्योंकि उन्होंने कहा कि जस्टिस वर्मा कभी पुरस्कारों के पीछे नहीं भागे.

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